कंप्यूटर के प्रकार | Types of Computer

Computer के प्रकार-तकनीकी रूप से और सैद्धान्तिक रूप से कम्प्यूटर निम्न तीन | प्रकार के होते हैं.

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आपका बहुत-बहुत स्वागत है हमारे इस Blog पर और आज हम सीखने वाले हैं Computer के  प्रकार के बारे में जिनके बारे में आपको जानना जरूरी है, अगर आप कंप्यूटर सीखना चाहते हैं.

आज के इस Article में आपको बहुत ही आसान भाषा में  Computer के  प्रकार के बारे में जानने को मिलेगा और कैसे काम करते हैं आपको सभी जानकारी आज पढ़ने को मिलेगी.

एनालॉग, डिजिटल और हाइब्रिड। जब कम्प्यूटर का विकास अपने प्रारम्भिक काल में था तब कुछ समय तक एनालॉग कम्प्यूटरों का चलन रहा। क्योंकि इनमें मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल तकनीक का प्रयोग किया गया था। पोलैंड में बना ELWAT नामक एनालॉग कम्प्यूटर इसी तकनीक से बनाया गया था।

इसके पश्चात् Digital तकनीक का विकास हुआ। जब डिजिटल तकनीक का विकास अपने शुरूआती दौर में था तो एनालॉग और डिजिटल तकनीक को मिलाकर हाइब्रिड कम्प्यूटरों का विकास हुआ।

कम्प्यूटर की तीसरी पीढ़ी में इस हा था। धीरे-धीरे Digital तकनीक का विकास होता गया और सत्तर के तकनीक को कम्प्यूटरों में प्रयोग किया जाने लगा। वर्तमान समय के समस्त कर तकनीक पर आधारित हैं। इसीलिये इन्हें Digital Computer भी कहा जाता PC हो, Laptop हो या फिर Super Computer, ये सभी Digital Computer कम्प्यूटर हैं।

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कंप्यूटर के प्रकार | Types of Computer

डिजिट कम्प्यूटरों को हम अपनी सुविधा, प्रयोग और कम्प्यूटर की कार्य क्षमता के अनुसार चार भागों में विभाजित सकते हैं.

(1) माइक्रो कम्प्यूटर

(2) मिनी कम्प्यूटर

(3) मनफ्रम कम्प्यूटर

(4) सुपर कम्


(1) माइक्रो कम्प्यूटर- Mircro Computer

इन कम्प्यूटरों का विकास सन् 1970 में Computer ऑन के सिद्धान्त के आधार पर हुआ। माइक्रोप्रोसेसर से युक्त होने के कारण इन्हें माइक्रो कम्य कहते हैं। इस तकनीक से युक्त कम्प्यूटर आकार में छोट, कीमत में कम, कार्यक्षमता शक्तिशाली तथा प्रयोग में अत्यन्त सरल होते हैं। वर्तमान में प्रचलित समस्त पीसी इसी श्रेणी अन्तर्गत आते हैं।

micro computer in hindi

Personal Computer का निर्माण 1981 में IBM द्वारा किया गया, लेकिन प्रारम्भ में इसमें सिर्फ 8084 से 8087 तक के माइक्रोप्रोसेसर, 256 किलोबाइट रैम तथा 180 किलोबाइट से लेकर 360 किलोबाइट (2D) क्षमता वाली फ्लॉपी डिस्क ड्राइव तथा इसमें DOS के प्रारम्भिक संस्करणों का प्रयोग किया जाता था। इसे सीमित एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर्स के लिये प्रयोग किया जाता था जैसे वर्ड प्रोसेसिंग और BASIC प्रोग्रामिंग इत्यादि। इसके अतिरिक्त इस कम्प्यूटर में प्रयोग की जाने वाली फ्लॉपी डिस्क का आकार आजकल की तरह 51/4″ न होकर 81/2″ हुआ करता था। ___ PC-XT (एक्सटेंडेड टेक्नोलॉजी) कम्प्यूटर तथा इससे पूर्व प्रचलित PC में मात्र इतना अंतर था कि इसमें 8088 प्रोसेसर का प्रयोग किया गया और इसमें 1 मेगाबाइट से लेकर 40 मेगाबाइट तक की हार्डडिस्क तथा 1 मेगाबाइट तक रैम का प्रयोग किया। बाद में तकनीक में सुधार होने के पश्चात् इसमें 360 किलोबाइट Floppy Drive के स्थान पर 1-2 Megabyte की Floppy Disk Drive का प्रयोग किया जाने लगा। इसके अतिरिक्त इसमें एक साथ दो फ्लॉपी डिस्क तथा दो Hard disk का प्रयोग सम्भव हो सका। तकनीक में परिवर्तन होने के कारण इसमें अनेक आधुनिक तथा विशाल Application Software का प्रयोग सम्भव हो सका।

PC-AT (Advanced Technology) कम्प्यूटरों का विकास 1985 तक पूरा हो पाया। इस तकनीक से युक्त कम्प्यूटरों तथा इससे पूर्व प्रचलित इसी श्रेणी के कम्प्यूटरों में जो आधारभूत अंतर था वह केवल इतना था कि यह 16 बिट कम्प्यूटर थे तथा इसमें पूर्व प्रचलित 8-बिट कम्प्यूटर । इस श्रेणी के कम्प्यूटरों का आज विश्व के 80 प्रतिशत पर्सनल कम्यूटर माकट पर अपना आधिपत्य है। इस श्रेणी के अंतर्गत आने वाले समस्त कम्प्यूटर 16-बिट से लेकर 64 बिट तक के होते हैं। वर्तमान समय में 80586 माइक्रोप्रोसेसर से युक्त पेंटियम नामक कम्प्यूटर सबसे शक्तिशाली तथा आधुनिक हैं।

(2) मिनी कम्प्यूटर- Mini Computer

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यह Computer मेनफ्रेम कम्प्यूटरों से छोटे तथा PC कम्प्यूटरों से बड़े होते हैं अर्थात् यह बीच के कम्प्यूटर होते हैं। यह कम्प्यूटर भी दो प्रकार के होते हैं, पहला स्माल Mini Computer कम्प्यूटर तथा दूसरा सुपर मिनी कम्प्यूटर। इन कम्प्यूटर की processing शक्ति PC कम्प्यूटरों से अधिक लेकिन मेनफ्रेम कम्प्यूटरों से कम होती है। यह कीमत में माइक्रो कम्प्यूटर से अत्याधिक महंगे होते हैं, इसलिये व्यक्तिगत रूप से इनका प्रयोग सम्भव नहीं है। इन कम्प्यूटरों का सर्वाधिक प्रयोग सरकारी संस्थायें तथा बड़ी व्यापारिक संस्थायें ही करती हैं।

(3) मेनफ्रेम कम्प्यूटर- Mainframe Computer

मेनफ्रेम computer in hindi

इस Computer की Data processing शक्ति मिनी कम्प्यूटर से अत्याधिक होती है तथा इनकी कीमत भी बहुत अधिक होती है। इन कम्प्यूटरों का प्रयोग बड़ी सरकारी संस्थायें तथा व्यापारिक संस्थायें किया करती हैं। इन कम्प्यूटरों को एक साथ कई व्यक्ति अलग-अलग कार्यों के लिये प्रयोग कर सकते हैं।

(4) सुपर कम्प्यूटर- Super Computer

super computer in hindi

अभी तक विकसित समस्त कम्प्यूटरों में यह सबसे शक्तिशाली Computer है। इसका प्रयोग स्पेस साइंस में अत्यन्त सफलतापूर्वक किया जा रहा है। इसकी डाटा प्रोसेसिंग गति अत्यन्त तीव्र होती है, यह एक सेकेंड में अरबों गणनायें करने में सक्षम होता है। इसका प्रयोग अत्यन्त उच्चकोटि की एनीमेशन में भी किया जाता है। उक्त समस्त विशेषताओं के कारण यह अत्यन्त महंगा है। भारत में पुणे (महाराष्ट्र) स्थित सीडॅक (CDAC) नामक संस्था ने परम-10000 नामक Super Computer का निर्माण किया है जो दुनिया के किसी भी सुपर कम्प्यूटर से कम नहीं है।

कम्प्यूटर प्रणाली स्थापित करने के उद्देश्य के आधार पर कम्प्यूटर के प्रकार

कम्प्यूटर प्रणाली की स्थापना दो उद्देश्यों के लिये हो सकती है- व्यापक या सामान्य तथा कार्य विशेष। इस प्रकार Computer उद्देश्य के आधार पर इनके निम्नलिखित दो प्रकार होते हैं.

(1) सामान्य-उद्देश्यीय कम्प्यूटर (2) विशिष्ट-उद्देश्यीय कम्प्यटर।

(1) सामान्य-उद्देश्यीय कम्प्यूटर-

ऐसे Computers जिनमें अनेक प्रकार के कार्य करने की क्षमता होती है लेकिन ये कार्य अधिकतर प्रयोक्ताओं द्वारा किये जाते हैं और सामान्य होते हैं, जैसे- किसी पत्र एवं दस्तावेज को टाइप करके कम्प्यूटर में संग्रहीत करना, दस्तावेजों को छापना, सारणीबद्ध आँकड़ों का संकलन या Database बनाना आदि। सामान्य उद्देशीय कम्प्यूटर के आन्तरिक परिपथ में लगे माइक्रोप्रोसेसर की कीमत भी कम होती है।

इन कम्प्यूटरों में हम किसी विशिष्ट कार्य या अनुप्रयोग हेतु अलग से डिवाइस नहीं जोड माइक्रोप्रोसेसर की क्षमता सीमित होती है और सी.पी.यू. का अनविन्यासक नहीं होता है.

2) विशिष्ट उद्देशीय कम्प्यूटर-

आजकल किसी अपराधी द्वारा झूठ बोले जाने के जैसे विशिष्ट कार्य कम्प्यूटर तकनीक की सहायता से ही किये जाते हैं। कि कम्प्यटर ऐसे कम्प्यूटर हैं जिन्हें किसी विशेष कार्य के लिये तैयार किया जाना माइक्रोप्रोसेसर की क्षमता उस कार्य के अनुरूप होती है जिसके लिये इन्हें तैयार की है।

इनमें यदि अनेक माइक्रोप्रोसेसरों की आवश्यकता हो तो इनकी अनविन्यास अनेक माइक्रोप्रोसेसर वाली कर दी जाती है। ___ Multimedia में Music-संपादन करने हेतु किसी Studio में लगाया जाने वाला कर विशिष्ट उद्देशीय Computer होगा। इसमें संगीत से सम्बन्धित उपकरणों को जोड़ा जा सकता और संगीत को विभिन्न प्रभाव देकर इसका संपादन किया जा सकता है।

इंटरनेट की सा में कम्प्यूटर को टेलीफोन लाइन से जोड़कर हम दूरस्थ कम्प्यूटर से सम्पर्क स्थापित कर सकर हैं। फिल्म उद्योग में फिल्म संपादन के लिये विशिष्ट उद्देशीय कम्प्यूटरों का उपयोग किया जाता है। इसके अलावा विशिष्ट उद्देशीय कम्प्यूटर निम्नलिखित क्षेत्रों में भी उपयोगी हैं.

(i) जनगणना

(ii) मौसम विज्ञान

(ii) युद्ध के समय प्रक्षेपास्त्रों का नियन्त्रण

(iv) उपग्रह प्रक्षेपण व संचालन

(V) भौतिक व रसायन विज्ञान में शोध

(vi) चिकित्सा, यातायात-नियन्त्रण, समुद्र-विज्ञान व तेल खनन

(vii) कृषि विज्ञान व अनुसंधान

(viii) अभियांत्रिकी, अन्तरिक्ष-विज्ञान, इंटरनेट और मोबाइल सेवा।

प्रणाली की कार्य-पद्धति या अनुप्रयोग के आधार पर कम्प्यूटर के प्रकार-

आजकल Computer का सभी क्षेत्रों में व्यापक प्रयोग किया जाता है। विभिन्न प्रणालियों में कम्प्यूटर के अनेक अनुप्रयोग हैं जिनमें से कार्य-पद्धतियों के आधार पर कम्प्यूटरों के पाँच वर्ग होते हैं.

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(1) अंकीय कम्प्यूटर

(2) अनुरूप या एनालॉग कम्प्यूटर

(3) संकर या हाइब्रिड कम्प्यूटर

(4) प्रकाशीय कम्प्यूटर

(5) परमाणवीय या एटॉमिक कम्प्यूटर।।

(1) अंकीय कम्प्यूटर-

अधिकतर Computer डिजीटल कम्प्यूटर होते हैं। Digital का अर्थ यह है कि कम्प्यूटर में सूचना को इस प्रकार की चर राशियों द्वारा व्यक्त किया जाता है, जिनमें डिस्क्रीट निश्चित अंकों को निरूपित किया जा सकता है। उदाहरणार्थ, 7 दशमलव अंक दस प्रकार के मान निश्चित मान प्रदान करते हैं। 1940 के दशक का सबसे पहला कम्प्यूटर प्रमुख रूप से अंकीय गणनाओं को सम्पन्न करने के लिये प्रयुक्त होता था।

इसी कारण Computer को Digital Computer का नाम दिया गया। प्रयोगात्मक रूप से केवल दो अंकों का प्रयोग करने पर Digital Computer की क्रियायें अधिक सटीक तथा विश्वसनीय होती हैं। मानव, सूचना की अभिव्यक्ति अनेक गतिविधियों से करता है। इन गतिविधियों में से सत्य और असत्य को व्यक्त करना भी एक अभिव्यक्ति है। किसी पुर्जे में दो भौतिक गुण।

स्पष्ट रूप से उपस्थित हो सकते हैं, वे हैं- सक्रियता एवं निष्क्रीयता। सक्रिय अवस्था, सत्य को और निष्क्रिय अवस्था, असत्य को व्यक्त करती है। डिजिटल कम्प्यूटर डाटा और प्रोग्राम्स को 0 से 1 के संकेतों में परिवर्तित करके उनको इलेक्ट्रॉनिक रूप में ले आता है।

(2) अनुरूप या एनालॉग कम्प्यूटर-

एनालॉग शब्द का अर्थ है- दो राशियों में अनुरूपता। ये वे Computer होते हैं जिनमें भौतिक राशि (जैसे दाब, तापमान, लम्बाई आदि) को इलेक्ट्रॉनिक परिपथों की सहायता से विद्युत संकेतों में रूपान्तरित किया जाता है। ये कम्प्यूटर किसी राशि का परिमाप तुलना के आधार पर करते हैं। जैसे कि एक थर्मामीटर कोई गणना नहीं करता है अपितु यह पारे के सम्बन्धित प्रसार की तुलना करके शरीर के तापमान का स्तर व्यक्त करता है।

विद्युत स्पन्दों एनालॉग कम्प्यूटर मुख्य रूप से विज्ञान और engineering के क्षेत्र में प्रयोग किये जाते हैं, क्योंकि इन क्षेत्रों में मात्राओं का अधिक उपयोग होता है। ये कम्प्यूटर केवल अनुमानित परिमाप ही देते हैं। उदाहरणार्थ, एक पेट्रोल पम्प में लगा एनालॉग Computer, पम्प से निकले पेट्रोल की मात्रा को मापता है और लीटर में दिखाता है तथा उसके मूल्य की गणना करके स्क्रीन पर दिखाता है।

(3) संकर या हाइब्रिड कम्प्यूटर-

वे Computer जिनमें एनालॉग कम्प्यूटर और Digital Computer, दोनों के गुणों का सम्मिश्रण हो, संकर या हाइब्रिड कम्प्यूटर कहलाते हैं। हाइब्रिड का अर्थ है- संकरित अर्थात् अनेक विशेषताओं का सम्मिश्रण। उदाहरणार्थ- Computer की एनालॉग Device किसी रोगी के लक्षणों- तापमान, रक्तचाप आदि को मापती है। ये परिमाप बाद में डिजिटल भाग के द्वारा अंकों में बदले जाते हैं। इस प्रकार रोगी के स्वास्थ्य में आये उतार-चढ़ाव का तत्काल प्रेक्षण किया जा सकता है।

(4) प्रकाशीय कम्प्यूटर-

आधुनिक युग के कम्प्यूटरों के रूप में इस प्रकार के कम्प्यूटर बनाये जा रहे हैं जिनमें एक पुर्जे (अवयव) को दूसरे से जोड़ने का कार्य ऑप्टीकल फाइबर के तारों से किया जाता है। इनके गणना करने वाले अवयव या डिवाइस प्रकाशीय पद्धति पर आधारित बनाये गये हैं। विद्युत संकेतों की गति 3 लाख किलोमीटर प्रति सेकण्ड की कोटि की होती है लेकिन इतनी गति से भी 1 मीटर के तार में विद्युत संकेत को 3.3 नानो सेकण्ड का समय लगाता है। प्रकाशन के संवहन के लिये तार जैसे माध्यम की आवश्यकता नहीं होती है। जिससे प्रकाश की गति, विद्युत से अधिक होती है इसलिये बिना तार के प्रकाशीय पद्धति आधारित कम्प्यूटर विकसित किये जा रहे हैं।

(5) परमाणवीय या एटॉमिक कम्प्यूटर-

ये ऐसा विकासशील Computer है जिसमें कुछ विशेष प्रोटीन अणुओं को एकीकृत परिपथ में बदला जाये और इसमें इतनी अधिक स्मृति क्षमता आ जाये कि यह आज के कम्प्यूटरों से 10,000 गुना अधिक क्षमता वाला हो।


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