Computer का आविष्कार कब और किसने किया था?

अगर आप जानना चाहते हैं कंप्यूटर का आविष्कार किसने किया था तो आप बिल्कुल सही जगह पर आ गए हैं क्योंकि आज के इस आर्टिकल में हम कंप्यूटर के अविष्कार के बारे में जानेंगे कि कंप्यूटर की खोज किसने की थी और यह कब हुई थी.

Computer का आविष्कार कब और किसने किया था?

कंप्यूटर एक प्रकार के नहीं होते हैं कंप्यूटर कई प्रकार के होते हैं जैसे कि Mini Computer, Micro Computer, Super Computer कंप्यूटर माइक्रो कंप्यूटर सुपर कंप्यूटर इत्यादि.

आप सभी जानते हैं कि कंप्यूटर क्या है और यह कैसे कार्य करता है साथी साथ आप जानते होंगे यह मानव द्वारा निर्मित एक Electronic Machine है जो कि घंटों का काम मिनटों में कर देती है.

कंप्यूटर का आविष्कार कब और किसने किया था?

कंप्यूटर का आविष्कार Charles Babbage (चार्ल्स बैबेज) द्वारा किया गया है जिससे Computer का जनक भी कहा जाता है यह बहुत ही लोकप्रिय programmer Computer designer थे.

चार्ल्स बैबेज ने सन् 1822 में एक Machine का निर्माण किया जिसका व्यय ब्रिटिश सरकार ने उठाया। इस मशीन का नाम डिफरेन्स इंजिन (Defense engine) रखा गया.

कंप्यूटर विज्ञान के जनक

(1) ऐबेकस

प्राचीनतम गणना मशीन, जिसे हम Digital Computer की श्रेणी में रखते हैं, ऐबेकस है। ऐबेकस को सोरोबेन भी कहा जाता है। Abacus तारों का एक फ्रेम होता है, जिसके चारों ओर प्रायः लकड़ी का बाहरी फ्रेम होता है। इसके तारों में मोती पिरोये होते हैं। ये मोती पक्की मिट्टी के गोल छिद्रयुक्त टुकड़े होते हैं। ऐबेकस स्थानीय मान अंकन पद्धति के सिद्धान्त पर कार्य करता है। यह विभिन्न पंक्तियों में मोतियों का स्थान व उनका मान निश्चित करता है। मोतियों को एक दिशा में सरका कर गिना जाता है। सरल संगणनायें, जैसे- जोड़ना और घटाना, मोतियों को इधर-उधर सरका कर की जाती हैं।

ऐबेकस का आविष्कार चीन में हुआ, जहाँ इसे स्पून पेन कहा जाता है, जिसका मतलब गणना-पटल होता है। वैसे तो ऐबेकस का आविष्कार 600 बी.सी. में हुआ था, परन्तु इसकी तीव्रगति और सरलता के कारण आज भी कई देश इसका उपयोग कर रहे हैं।

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(2) नेपियर्स बोन्स-

1617 ई. में सर जॉन नेपियर ने जोड़ने, घटाने, गुणा और भाग आदि के लिये एक यन्त्र का निर्माण किया। यह यन्त्र 11 आयताकार छड़ों के समूह से निर्मित था। प्रत्येक छड़ 10 वर्गों में विभक्त थी। ऊपरी वर्ग में 0 से 9 तक की संख्यायें होती

 थीं। नीचे के वर्गों में उन संख्याओं के गुणज लिखे होते थे। छड़ों को पंक्तियों में विशेष प्रकार से व्यवस्थित कर, बड़ी संख्याओं को तीव्र गति से गुणा किया जाता था। नेपियर्स बोन्स को कार्डबोर्ड गुणन Calculator भी कहा जाता है।

(3) स्लाइड रूल-

स्लाइड रूल का आविष्कार विलियम ऑर्टड ने किया। स्लाइड रूल मे संगणनायें लघुगणक द्वारा की जाती थीं।

(4) पास्कल तथा लेबनीज (Pascal and Leibniz)-

सन् 1642 में ब्लेज पास्कल ने सबसे पहले यांत्रिक गणना यंत्र (Mechanical Calculating Machine) का आविष्कार किया था। यह मशीन केवल जोडने व घटाने की क्रिया करने में सक्षम थी, इसी कारण इसे एडिंग मशीन (Adding Machine) का नाम दिया गया। यह मशीन घड़ी (Watch) और ओडोमीटर (Odometer) के सिद्धान्त पर कार्य करती थी।

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इसमें कई दाँतेयुक्त चकरियाँ थीं जो घूमती रहती थीं। चकरियों के दाँतों पर 0 से 9 तक के अंक छपे रहते थे। प्रत्येक चकरी (Wheel) का एक स्थानीय मान (Positional/Place Value) था, जैसे- इकाई, दहाई, सैकड़ा आदि। इसमें प्रत्येक चकरी स्वयं से पिछली चकरी के एक चक्कर लगाने पर एक अंक पर घमती थी। ब्लेज पास्कल की इस ऐडिंग मशीन (Adding Machine) को पास्कलाइन (Pascaline) कहते हैं जो सबसे पहला यांत्रिकीय गणना यंत्र (Mechanical Calculating Machine) था। आज भी कार व स्कूटर के स्पीडोमीटर में यही सिस्टम कार्य करता है। इस आविष्कार के लिये उसे प्रेरणा 19 वर्ष की आयु में ही मिल गई थी। इसके बाद सन् 1673 में जर्मन गणितज्ञ व दार्शनिक गॉटफ्रेड वॉन लेबनीज (1646-1716) (Gottfried von Leibniz) ने पास्केलाइन का विकसित रूप तैयार किया जिसे रेकनिंग मशीन (Reckoning Machine) कहते हैं। यह मशीन अंकों के जोड़ व बाकी के अलावा गण व भाग की क्रिया भी कर सकती थी।

(5) जोसेफ जेकार्ड (Joseph Jacquard)-

सन् 1801 में फ्रांसीसी बुनकर (Weaver) जोसेफ जेकार्ड (Joseph Jacquard) ने कपड़े बुनने के ऐसे लूम का आविष्कार किया जो कपड़ों में डिजाइन या पैटर्न स्वतः देता था। इस लूम की विशेषता यह थी कि यह कपड़े के पैटर्न को कार्डबोर्ड के छिद्रयुक्त पंचकाडों से नियन्त्रित करता। की उपस्थिति अथवा अनुपस्थिति द्वारा धागों को निर्देशित किया जाता था। जेल ने दो विचारधारायें दी जो आगे कम्प्यूटर के विकास में उपयोगी सिद्ध हुई।

पहली सूचना को पंचकार्ड पर कोडित किया जा सकता है। दूसरी विचारधारा यह थी कि पर संग्रहीत सूचना, निर्देशों का समूह है जिससे पंचकार्ड को जब भी काम में लिया जा निर्देशों का यह समूह एक प्रोग्राम के रूप में कार्य करेगा।

(6) बैबेज और उसके इंजिन (Babbage and His Engines)-

अंग्रेज गणितल चार्ल्स बैबेज ने एक यांत्रिक गणना मशीन विकसित करने की आवश्यकता तब अनभव जबकि गणना के लिये बनी हुई सारणियों में त्रुटि आती थी। चूंकि ये सारणियाँ हस्त-निर्मित थीं इसलिये इनमें त्रुटि आ जाती थी। कम्प्यूटर के इतिहास में उन्नीसवीं शताब्दी का प्रारम्भिक समय स्वर्णिम काल माना जाता है। चार्ल्स बैबेज ने सन् 1822 में एक Machine का निर्माण किया जिसका व्यय ब्रिटिश सरकार ने उठाया। इस मशीन का नाम डिफरेन्स इंजिन रखा गया। इस मशीन में गियर और शाफ्ट लगे थे और यह भाप से चलती थी। चार्ल्स बैबेज ने डिफरेंस Engine का विकसित रूप एक शक्तिशाली मशीन एनालिटिकल इंजिन सन् 1833 में तैयार किया।

Computer ka aveshkar

डिफरेंस इंजिन कई प्रकार के गणना कार्य करने में सक्षम था। यह पंचकार्डों पर संग्रहीत निर्देशों के समूह द्वारा निर्देशित होकर कार्य करती थी। इसमें निर्देशों को संग्रहीत करने की क्षमता थी और इसके द्वारा स्वचालित रूप से परिणाम भी छापे जा सकते थे।

बैबेज का Computer के विकास में बहुत बड़ा योगदान रहा। बैबेज का एनालिटिकल इंजन आधुनिक कम्प्यूटर का आधार बना और यही कारण है कि चार्ल्स बैबेज को कम्प्यूटर विज्ञान का जनक कहा जाता है।

उन्होंने अपना सर्वस्व एनालिटिकल इंजिन के विकास में लगाया लेकिन वे इस मशीन के क्रियाशील मॉडल को देख नहीं पाये। बाद में उनकी सहयोगिनी एडा ऑगस्टा ने इस कार्य को आगे बढ़ाया और उन्हें दुनियाँ की सबसे सर्वप्रथम प्रोग्रामर कहा जाने लगा क्योंकि उनका कार्य एनालिटिकल इंजिन में निर्देशों को संग्रहीत करना और इस मशीन को चलाना था। एडा ऑगस्टा ने ही द्वि-आधारी संख्याओं का आविष्कार किया।

(7) हर्मन होलेरिथ, जनगणना और पंचकार्ड-

Computer के इतिहास में सन् 1890 में एक और महत्वपूर्ण घटना हुई, वह थी America की जनगणना का कार्य। इससे पूर्व जनगणना का कार्य पारम्परिक तरीकों से किया जाता था।

सन् 1880 में शुरू की गई जनगणना में 7 वर्ष लगे थे। कम समय में जनगणना के कार्य का सम्पन्न करने के लिये हर्मन होलेरिथ ने एक मशीन बनाई जिसमें पंचकाओं को विद्युत द्वारा संचालित किया गया। इस मशीन की सहायता से जनगणना का कार्य केवल तीन वर्ष में पूरा हो गया।

– सन 1896 में होलेरिथ ने पचकार्ड यंत्र बनाने का एक कम्पनी टेबुलेटिंग मशीन कम्पनी स्थापित की। सन् 1911 में इस कम्पनी का अन्य कम्पनी के साथ मिलकर परिवर्तित नाम कम्प्यूटर टेबुलेटिंग रेकॉर्डिंग कम्पनी हो गया। सन् 1924स कम्पनी का नाम पुनः बदलकर इंटरनेशनल बिजनेस मशीन हो गया। अब कम्प्यूटर विद्युत यांत्रिकी के युग में आ गये। क्योंकि होलेरिथ की मशीन यांत्रिक एवं विद्युत से संचालित थी।

8) आइकेन, आई.बी.एम., और मार्क-

1-आई.बी.एम. के चार शीर्ष इंजीनियरों व डॉ. हॉवर्ड आईकेन ने सन् 1944 में एक मशीन को विकसित किया और इसका आधिकारिक नाम ऑटोमेटिक सिक्वेन्स कन्ट्रोल्ड केल्कलेटर रखा। बाद में इस मशीन का नाम मार्क- रखा गया। यह विश्व का सबसे पहला विद्यत यांत्रिकी कम्प्यूटर था। इसम 500 मील लम्बाई के तार व 30 लाख विद्युत संयोजन थे। यह 6 सेकण्ड में एक गुणा आर 12 सेकण्ड में एक भाग की क्रिया कर सकता था। इस प्रकार अब विद्युत यांत्रिक कंप्यूटिंग शिखर पर पहुंच चुकी थी

(9) एटानासॉफ-बेरा कम्पयूटर : ए.बी.सी.-

सन 1939 मे एटानासॉफ ने लोवा स्टेट विश्वविद्यालय से 650 डॉलर का अनुदान प्राप्त किया है। इस अनुदान से एटानासॉफ ने स्लिफॉर्ड बेरी की पार्ट टाइम सेवाओं को प्राप्त किया। सन 1945 में एटानासाफ ने एक इलेक्ट्रॉनिक मशीन को विकसित किया जिसका नाम ए.बी.सी. रखा गया। ए.बी.सी. शब्द Atanasoff-Berry Computer का संक्षिप्त रूप है। ए.बी.सी. सबसे पहला इलेक्ट्रॉनिक डिजिटल कम्प्यूटर था।

आइकेन और आई.बी.एम. के मार्क- की तकनीक, नई इलेक्ट्रॉनिक्स तकनीक के आने से पुरानी हो गई। नई इलेक्ट्रॉनिक तकनीक में कोई यांत्रिक पुर्जा संचालित करने की आवश्यकता नहीं थी जबकि मार्क-1 एक विद्युत मशीन थी। नई इलेक्ट्रॉनिक तकनीक मशीनों में विद्युत की उपस्थिति और अनुपस्थिति का सिद्धान्त था। चूँकि इसमें कोई चलायमान पुर्जा नहीं था। इसलिये यह विद्युत यांत्रिक मशीन से तेज गति की मशीन हो गई।

(10) प्रथम बृहद स्तर का सामान्य उद्देश्य इलेक्ट्रॉनिक कम्प्यूटर-

एनिएक- द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान अमेरिकन सेना को युद्ध के समय शस्त्रों को लक्ष्य की ओर स्थित करने के लिये जटिल गणनायें करनी पड़ती थीं। उसी समय विद्युत अभियंता जे.पी. एकर्ट और जॉन मुचली ने सेना के लिये एक Electronic Computer बनाकर देने का प्रस्ताव रखा।

सन् 1946 में एकर्ट और मुचली ने एक कम्प्यूटर बनाया जिसका नाम था- एनिऐक। यह दुनियाँ का सबसे पहला वृहद् स्तर का जनरल पर्पज Electronic Computer था। यह 100 फीट लम्बा व 10 फीट ऊँचा था। इसमें 18000 वैक्यूम ट्यूब थीं और यह 140 किलोवाट विद्युत से चलता था। इसका वजन 30 टन था।

(11) EDSAC और EDVAC-

ENIAC के प्रयोग में एक मुख्य समस्या यह थी कि प्रत्येक नई गणना के लिये इसके ऑपरेटर्स को गणनाओं की नई विधि की आवश्यकता होती थी। ऑपरेटर्स को पुनः नये परिपथों को लिखना पड़ता था और नये अनुविन्यास में समायोजित करना आवश्यक था।

इस प्रक्रिया में समय बेकार जाता था। इसके समाधान के लिये गणितज्ञ जॉन वॉन न्यूमान ने सन् 1946 में ईकेन, मेस्चली, गोलस्मिथ एवं वर्क्स के साथ मिलकर एक Computer तैयार किया जिसमें क्रियाओं के लिये निर्देशों के समूह Program को संग्रहीत किया जा सकता था और इसके बाद नई क्रिया के लिये नया प्रोग्राम संग्रहीत किया जा सकता था।

अतः नई गणनाओं के लिये Computer में तारों के संयोजन बदलने की कोई आवश्यकता नहीं थी। इस प्रकार संग्रहीत प्रोग्राम के सिद्धान्त का जन्म हुआ। सबसे पहला संग्रहीत प्रोग्राम कम्प्यूटर सन 1949 में इंग्लैण्ड के केम्ब्रिज विश्वविद्यालय के प्रोफेसर विल्कस ने एडसेक के रूप में तैयार किया। इसके अलावा वॉन न्यूमान ने सन् 1950 में एडवेक विकसित किया।

वाणिज्यिक कम्प्यूटिंग की शुरूआत सन् 1951 में तब हुई जब जनगणना के लिये अमेरिकन ब्यूरो ने UNIVAC कम्प्यूटर खरीदा। यह कम्प्यूटर ENIAC का विकसित रूप था.

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